बाज़ार में "नकली काजू" का मतलब आमतौर पर प्लास्टिक या कोई बनावटी चीज़ नहीं होता। असल में गड़बड़ी तीन जगह होती है: पैक पर लिखा ग्रेड और अंदर का माल अलग होना, टूटे हुए दाने साबुत बताकर बेचना, और पुराना माल जिसका तेल खराब हो चुका है। तीनों की जाँच आप रसोई में, बिना किसी मशीन के कर सकते हैं।
काजू का ग्रेड क्या होता है?
काजू का ग्रेड एक असली निर्यात मानक है। W का मतलब है White Whole, यानी साबुत और बिना टूटा सफ़ेद दाना। उसके बाद की संख्या बताती है कि एक पाउंड (लगभग 450 ग्राम) में कितने दाने आते हैं। संख्या जितनी छोटी, दाना उतना बड़ा।
| ग्रेड | प्रति पाउंड दाने | 100 ग्राम में लगभग दाने |
|---|---|---|
| W160 | 140–160 | 31–35 |
| W180 | 170–180 | 37–40 |
| W240 | 230–240 | 50–53 |
| W320 | 300–320 | 66–70 |
सुपरमार्केट में मिलने वाला ज़्यादातर काजू W320 होता है। पैक पर सिर्फ़ "बड़ा काजू" या "जंबो" लिखा हो और ग्रेड न दिया हो, तो अक्सर वह W320 ही निकलता है, कभी-कभी उसमें टूटे दाने भी मिले होते हैं।
घर पर जाँच के चार आसान तरीके
1. गिनकर देखें। यह सबसे पक्का तरीका है। तराज़ू पर 100 ग्राम काजू तौलें और दाने गिनें। W160 का दावा हो और आपको 68 दाने मिलें, तो जवाब मिल गया।
2. रंग देखें। अच्छा काजू एक जैसा हल्का हाथीदाँत (आइवरी) रंग का होता है। पीलापन पुराने या ज़्यादा सुखाए गए माल का संकेत है। भूरे धब्बे शेलिंग के समय जलने से आते हैं। इससे स्वाद नहीं बदलता, लेकिन उसे W ग्रेड बताकर बेचना ठीक नहीं।
3. आकार देखें। साबुत काजू का कमा (,) जैसा आकार होता है और अंदर की मुड़ी हुई रेखा बिना टूटी रहती है। मुट्ठी भर दाने लें। अगर हर तीसरे दाने का एक तरफ़ सपाट कटा हुआ चेहरा है, तो वे दो फाँक में टूटे दाने हैं, साबुत नहीं।
4. सूँघें और चखें। ताज़ा काजू से हल्की मीठी, दूध जैसी खुशबू आती है। तेज़, मोमी या पेंट जैसी गंध का मतलब है कि तेल ऑक्सीडाइज़ हो चुका है। काजू में लगभग 46% वसा होती है और वह चुपचाप खराब होती है। भूनने से यह गंध नहीं छिपती।
टूटा काजू खराब नहीं होता
फाँक (स्प्लिट) और टुकड़े (पीस) उसी दाने के हिस्से हैं। काजू कतली, ग्रेवी और पीसने वाली चीज़ों के लिए ये समझदारी की खरीद हैं और सस्ते भी पड़ते हैं। समस्या तब है जब टूटा माल साबुत की कीमत पर बिके। मेहमानों के सामने रखने या गिफ़्ट के लिए W240 या उससे बड़ा दाना चुनें।
काजू कहाँ से आता है, इससे फ़र्क पड़ता है
भारत के तटीय इलाक़ों, जैसे मैंगलोर, गोवा और कोंकण, का काजू आमतौर पर ज़्यादा मीठा और नरम होता है। जिस पैक पर सिर्फ़ "काजू" लिखा हो और जगह का ज़िक्र न हो, वहाँ आमतौर पर वही माल होता है जो उस महीने सबसे सस्ता मिला। NutriBlend का काजू जंबो 250 ग्राम W160 ग्रेड है और मैंगलोर का है। ग्रेड पैक पर इसलिए छपा है कि आप उसे खुद गिनकर जाँच सकें।
काजू को खराब होने से कैसे बचाएँ
एयरटाइट डिब्बे में, अंधेरी अलमारी में, चूल्हे से दूर रखें। कमरे के तापमान पर सीलबंद काजू लगभग चार महीने चलता है, फ्रिज में लगभग आठ महीने। पैक खुलने के बाद यह समय आधा समझें। कुरकुरापन चला जाए तो तवे पर धीमी आँच पर पाँच मिनट सेंकने से लौट आता है, पर खराब हो चुका तेल वापस ठीक नहीं होता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
काजू का सबसे बड़ा ग्रेड कौन सा है? W160, यानी प्रति पाउंड 140–160 दाने। सामान्य व्यापार में यही सबसे बड़ा नियमित ग्रेड है।
काजू भूरा क्यों होता है? आमतौर पर शेलिंग के दौरान गर्मी से हल्का जल जाने के कारण। स्वाद वही रहता है, पर इसे SW ग्रेड कहते हैं और यह W से सस्ता होता है।
क्या ग्रेड से पोषण बदलता है? बहुत कम। प्रति ग्राम प्रोटीन, वसा और खनिज लगभग एक जैसे रहते हैं। ग्रेड से दाने का आकार, बनावट और मिठास बदलती है।
पैक पर ग्रेड क्यों नहीं लिखा होता? ग्रेड लिखने से तुलना हो जाती है। जब माल साधारण हो, तो अस्पष्ट रहना बेचने वाले के लिए आसान होता है।
ग्रेड पैक वाला ही होना चाहिए जो अंदर है। 100 ग्राम तौलिए और गिन लीजिए।